भारतीय लोकतंत्र के सशक्तीकरण में विपक्ष की भूमिका: एक समीक्षात्मक अध्ययन
Author(s): अविनाश प्रताप सिंह, गरिमा श्रीवास्तवा
Abstract: एक लोकतांत्रिक राष्ट्र में जीवंत और सशक्त लोकतंत्र की पहचान उस राष्ट्र के मजबूत विपक्ष से मानी जाती है। संसदीय लोकतंत्र मे सत्ता पक्ष और विपक्ष शासन प्रक्रिया में एक साथ गति करते हैं जहां बहुमत प्राप्त दल सत्तारूढ़ दल के रूप में तथा इससे अल्पमत में रहा दल अथवा कुछ दलों का गठबंधन विपक्ष के रूप में अपनी भूमिका निभाते है। विपक्ष के रूप में एक या एक से अधिक दल भी हो सकते हैं। स्वतंत्रता के पश्चात भारत में संसदीय लोकतांत्रिक शासन प्रणाली अपनाई गई है यहां भी बहुदलीय व्यवस्था विद्यमान है। विपक्ष सरकार और जनता के मध्य सेतु के रूप में कार्य करती है। बहुमत प्राप्त सत्ता पक्ष द्वारा नीतियां एवं योजनाएं बनाई जाती है और विपक्षी दल इन नीतियों पर पैनी दृष्टि रखते हुए इन नीतियों और योजनाओं को आलोचना अथवा समर्थन हेतु जनता के समक्ष रखते हैं और जनता की मांगों व समस्याओं को सरकार के समक्ष रखने का कार्य करते हैं। लोकतंत्र ही शासन का वह रूप है जो विपक्ष को मान्यता प्रदान करती है। मजबूत विपक्ष लोकतंत्र की मेरुदंड होती है जिसके अभाव में एक सशक्त लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती है।
अविनाश प्रताप सिंह, गरिमा श्रीवास्तवा. भारतीय लोकतंत्र के सशक्तीकरण में विपक्ष की भूमिका: एक समीक्षात्मक अध्ययन. Int J Political Sci Governance 2025;7(3):157-159. DOI: 10.33545/26646021.2025.v7.i3b.737