मधु लिमये का सामाजिक न्याय और लोकतंत्र में योगदान: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन
Author(s): दीपांकुर लाल
Abstract: यह शोध प्रबंध भारत के समाजवादी आंदोलन के एक प्रखर विचारक, लेखक और संसदीय नेता मधु लिमये के सामाजिक न्याय और लोकतंत्र में योगदान का विश्लेषण करता है। मधु लिमये ने अपने राजनीतिक जीवन में न केवल वैचारिक प्रतिबद्धता का परिचय दिया, बल्कि उन्होंने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर जनहित और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की। उनका जीवन और चिंतन भारत में समाजवादी राजनीति की उस धारा का प्रतिनिधित्व करता है, जिसने हाशिए पर खड़े वर्गों को मुख्यधारा में लाने का सतत प्रयास किया। यह अध्ययन उनके संसदीय वक्तव्यों, लेखों, आंदोलनकारी गतिविधियों तथा समकालीन राजनैतिक घटनाओं के संदर्भ में सामाजिक न्याय की उनकी अवधारणाओं का विश्लेषण करता है। विशेष रूप से यह शोध दर्शाता है कि मधु लिमये ने किस प्रकार विधायी प्रक्रियाओं, नीतिगत हस्तक्षेपों और वैचारिक संघर्षों के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत किया। आपातकाल का विरोध, संघवाद की वकालत, गैर-कांग्रेसी गठबंधनों की रणनीति, तथा पिछड़े वर्गों के अधिकारों की पैरवी—ये सभी उनके योगदान के प्रमुख आयाम हैं।
दीपांकुर लाल. मधु लिमये का सामाजिक न्याय और लोकतंत्र में योगदान: एक विश्लेषणात्मक अध्ययन. Int J Political Sci Governance 2025;7(2):20-23. DOI: 10.33545/26646021.2025.v7.i2a.613