किसान अस्मिता, राजनीति और नीति निर्माण: एक सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण
Author(s): अभिनंदन कुमार
Abstract: “किसान अस्मिता, राजनीति और नीति निर्माण: एक सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण” शीर्षक भारत में किसान वर्ग की बदलती पहचान, राजनीतिक भूमिका और नीतिगत प्रभावों का व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करता है। भारत की सामाजिक संरचना में किसान केवल आर्थिक उत्पादन का स्रोत नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, राजनीतिक और वैचारिक स्वरूप का भी केंद्र रहा है। हरित क्रांति के बाद कृषि संरचना में आए परिवर्तन, बढ़ती बाज़ार निर्भरता, लागत–आय असंतुलन और ग्रामीण-शहरी विषमता ने किसान अस्मिता को नई चुनौतियों के सामने खड़ा किया है। इस अध्ययन में किसान राजनीति के उभार, संगठनात्मक रूप, नेतृत्व की परिवर्तनशीलता तथा मुद्दों—जैसे एमएसपी, ऋणमुक्ति, भूमि अधिकार, कृषि कानून, और बाज़ार सुधार—को सामाजिक एवं राजनीतिक संदर्भ में विश्लेषित किया गया है। साथ ही, नीतिनिर्माण प्रक्रिया में किसानों की भागीदारी, राजनीतिक दलों की नीतिगत प्राथमिकताएँ, और सरकारों के कृषि सुधार एजेंडा के प्रभाव का तुलनात्मक अवलोकन प्रस्तुत किया गया है। अध्ययन यह दर्शाता है कि किसान आंदोलनों ने समय–समय पर सरकारों की नीति दिशा को प्रभावित किया है, परंतु प्रतिनिधित्व का संकट, विखंडित नेतृत्व, और क्षेत्रीय असमानताएँ किसान राजनीति को सीमित भी करती हैं। इसके बावजूद, हालिया किसान आंदोलन ने किसानों की सामूहिक पहचान (collective identity) और लोकतांत्रिक संवाद को पुनर्जीवित करते हुए कृषि नीतियों पर नए विमर्श को जन्म दिया है।
DOI: 10.33545/26646021.2025.v7.i10c.787Pages: 257-260 | Views: 124 | Downloads: 2Download Full Article: Click Here
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अभिनंदन कुमार.
किसान अस्मिता, राजनीति और नीति निर्माण: एक सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषण. Int J Political Sci Governance 2025;7(10):257-260. DOI:
10.33545/26646021.2025.v7.i10c.787